CCE ka full form क्या है? हमारी शिक्षा प्रणाली में अब तक छात्रों के ज्ञान और कौशल का मूल्यांकन पारंपरिक तरीकों से किया जाता रहा है।और छात्रों के ज्ञान और स्तर का मूल्यांकन करने के लिए सत्रांत परीक्षाओं पर ही ध्यान केंद्रित किया जाता रहा है।

हालाँकि अब समय बहुत बदल गया है लेकिन छात्रों की शिक्षा और ज्ञान के दायरे को और विकसित करने की आवश्यकता है।जिससे छात्रों में ज्ञान का स्तर बढ़े। मोटे तौर पर कहें तो मूल्यांकन पद्धति और दृष्टिकोण में बहुत कुछ बदलने की जरूरत है।

तो ऐसे में सीसीई छात्रों के सच्चे विकास और उनकी पढ़ाई की गुणवत्ता के लिए उठाया गया एक बड़ा कदम है। तो आज इस ब्लॉग पोस्ट में हम इन्हीं विषयों पर चर्चा करने जा रहे हैं।

तो ये सीसीई क्या है और इसका शिक्षा के क्षेत्र में क्या सकारात्मक प्रभाव पड़ने वाला है, हम इसे समझने की कोशिश करेंगे।

CCE क्या है?

CCE या Continuous and Comprehensive Evaluation एक ऐसा दृष्टिकोण है जो केवल एक बार की परीक्षाओं पर निर्भर रहने के बजाय पूरे शैक्षणिक वर्ष में छात्रों के सीखने और विकास का आकलन करता है।

सीसीई को रचनात्मक और योगात्मक मूल्यांकन के साथ संयोजित किया गया है जो छात्रों को जिवन मे प्रगति के माग॔ को प्रसस्ह करने का काम करेगा और उन्है जिन्देगी के हर मौड़ पर ताकत जुटाने मे मदद करेगा।

CCE ka full form क्या है?

CCE का पूर्ण रूप “Continuous and Comprehensive Evaluation ” है। यह 2009 में भारत के शिक्षा का अधिकार अधिनियम द्वारा अनिवार्य मूल्यांकन की एक प्रक्रिया है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई और भारत की राज्य सरकारें मिलकर पूरे शैक्षणिक वर्ष में एक छात्र के विकास का लगातार आकलन करने के लिए इस मूल्यांकन प्रणाली को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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सीसीई के प्रमुख तत्व

रचनात्मक मूल्यांकन: सीसीई क्विज़, कक्षा चर्चा, परियोजनाओं, प्रस्तुतियों और व्यावहारिक प्रदर्शनों जैसे विभिन्न तरीकों के माध्यम से चल रहे मूल्यांकन पर जोर देता है।

ये मूल्यांकन शिक्षकों को छात्रों की समझ का आकलन करने और समय पर प्रतिक्रिया प्रदान करने में मदद करते हैं, जिससे समय पर हस्तक्षेप और व्यक्तिगत सीखने के अनुभव की अनुमति मिलती है।

योगात्मक मूल्यांकन: जबकि रचनात्मक मूल्यांकन जारी है, छात्रों के समग्र प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए समय-समय पर योगात्मक मूल्यांकन आयोजित किए जाते हैं।

ये मूल्यांकन आम तौर पर एक इकाई, सेमेस्टर या शैक्षणिक वर्ष के अंत में आयोजित किए जाते हैं, जो छात्रों के ज्ञान और कौशल की व्यापक तस्वीर प्रदान करते हैं।

मल्टीपल इंटेलिजेंस दृष्टिकोण: सीसीई मानता है कि छात्रों में विविध शक्तियां और क्षमताएं होती हैं।

यह एकाधिक बुद्धिमत्ता की अवधारणा को अपनाता है, जो बताता है कि व्यक्ति तार्किक-गणितीय, भाषाई, संगीत, स्थानिक, शारीरिक-गतिज, पारस्परिक, अंतर्वैयक्तिक और प्राकृतिक बुद्धिमत्ता जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं।

इन बुद्धिमत्ताओं को पूरा करने वाली मूल्यांकन विधियों की एक श्रृंखला को शामिल करके, सीसीई छात्रों को अपनी प्रतिभा दिखाने में सक्षम बनाता है और अधिक समावेशी सीखने के माहौल को बढ़ावा देता है।

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सीसीई के लाभ

भारतीय शिक्षा प्रणाली को एक बेहतर दिशा प्रदान करने के लिए इसे अमल मे लाया गया जिसका एकमात्र उद्देश्य students को एक उन्नत शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करना है।

नीचे सीसीई के कुछ प्रमुख लाभों के बारे मे दिया गया है:

विद्बार्थी को शिक्षा के अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।

सीसीई छात्रों और शिक्षकों के लिए शिक्षार्थी-अनुकूल वातावरण को भी बढ़ावा देता है क्योंकि यह मुलभुत शिक्षा के अलाबा छात्रों के सम्पुण॔ विकास पर ध्यान केंद्रित करता है।

आसान शद्बो मे कहा जाए तो यह शिक्षा का एक लचीला वातावरण प्रदान करता है जिससे छात्रों मे पढ़ाई लिखाई के प्रति अधिक रुचि और गतिदेखने को मिलती है और छात्रों को एक भय मुक्त शिक्षा का वातावरण मिलता है।

शिक्षा को बेहतर बनाने में मदद करता है

इस में, शिक्षक विभिन्न शिक्षण सहायक सामग्री और शिक्षण विधियों का उपयोग करता है जिनका मूल्यांकन प्रक्रिया में परीक्षण किया गया था।

यह पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या की कमज़ोरियों को सामने लाता है जिसके आधार पर इनमें समय के मांग के अनुरुप सुधार किया जा सकता है।

छात्रो पर विशेष ध्यान

हर छात्र कि अपनी एक अनुठी रुचि के क्षेत्र होता जिनके साथ वे आपने आपको अधिक सहज महसुस करता है। ऐसे मे अगर उसे सही प्रोस्साहन अनुकुल दिशा पदान कि जाए तो वे इस क्षेत्र मे बहुत आगे तक जा सकता है।

यह सभाविक है की हर बच्चे का I.Q स्तर अलग-अलग होते है और उनकी सिखने की क्षमता एक दूसरे से भिन्न होता है। कुछ बच्चे जबरदस्त प्रतिभाशाली या बुद्धिमान होते हैं, जबकि कुछ सीखने में औसतन होते हैं।

ऐसी स्हिती मे इन कमजोर या धीमी गति से सीखने वाले वच्चो को सीसीई शिक्षा पद्बति कि तहत उन छात्रों की पहचान करने और उन पर खास ध्यान देने में मदद मिलता है।

छात्रों की प्रगति का सभे॔क्षण

इसकी सहायता से शिक्षक छात्रों की उपलब्धि का मूल्यांकन करते हुये एक सूचकांक तैयार कर सकते हैं। इस पद्बति की मदद से हर एक छात्रों का कक्ष के विशिष्ट अवधि के दौरान उनकी द्बारा की गई प्रदर्शन और प्रगति की गुणवत्ता का रिकॉर्ड रखा जा सकता है।

जिससे छात्र की प्रगति को ट्रैक किया जा सकता है और यह पता लगाया जा सकता है कि उसकी प्रगति सही दिशा में जा रही है या नहीं ।

छात्रों की कमजोरि को ठिक करना

एक शिक्षक के तौरपर छात्रों की बेहतरी के लिए उनका मार्गदर्शन तबि कर सकता है जब वे उनकी ताकत और कमजोरियों को सही तरीको से समझ पाए।

सीसीई ब्यवस्हा मे शिक्षक को बच्चो की दैनिक गतिविधि के दौरान उनकी ताकत और कमजोरी का पता लगाने में मदद मिलता है जिन्है वे आगे सुधाने का प्रयास कर सकता है।

इसके अलाबा शिक्षक छात्र का मूल्यांकन के आधार पर उन्हें उनकी कमजोरियों और शक्तियों के बारे मे अवगत करा सकते हैं जो आगे चलके उन्हें अपना भविष्य का निमा॔ण करने में मदद करता हैं।

विद्यार्थीयों को प्रोतसाहित करता है

आमतौर पर विद्यार्थी पढ़ाई या परिक्षा से डरते हैं और उनसे वचना चाहते है। लेकिन CCE का लचिला पाठ्यक्रम उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करता हैं और पढ़ाई को गंभीरता से लेने के लिए प्रोतसाहित करता हैं।

ऐसे मे विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करता है और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित होते हैं।

लक्ष्य प्राप्ति में मदद करता है

शिक्षा का उद्देश्य हमेशा से ही छात्रों की व्यक्तित्व का विकास करना है। इन उद्देश्यों को पुरा करने के लिए शिक्षको मूल्यांकन की जरिए छात्रों की मानसिकताओ को समझने और उन्है सुधार ने में मदद करता है ताकी वे आगे चलके जीबन मे एक सठिक व्यक्तित्व का मालिक बन सके।

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सीसीई कैसे लागू किया जाता है?

सीसीई (संशोधित मूल्यांकन प्रणाली) का कार्यान्वयन भारतीय शैक्षिक प्राथमिकताओं के लिए विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों के मूल्यांकन को गुणात्मक, संवेदनशील और संतुलित बनाना है।

यह एक नियमित मूल्यांकन प्रक्रिया है जहां छात्रों का नियमित अंतराल पर मूल्यांकन किया जाता है।

सीसीई के तहत छात्रों को उनकी गतिविधियों, प्रदर्शन और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर अंक हासिल करने का मौका मिलता है।

इस प्रणाली से छात्रों को निरंतर मूल्यांकन के अवसर मिलते हैं जहां उन्हें अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार करने का मौका मिलता है। छात्रों द्वारा प्राप्त अंकों का न्यूनतम प्रतिशत ग्रेड के रूप में दिया जाता है।

सीसीई मॉड्यूल

क्विज़, ग्रुप डिस्कशन, क्लासरूम टीचिंग, पोस्टर और मॉडल मेकिंग, एमसीक्यू, असाइनमेंट, लैब एक्सरसाइज, प्रैक्टिकल क्लासेस, रोल प्ले, रिपोर्ट राइटिंग, करंट अफेयर्स, टॉपिक डिस्कशन, न्यूज रीडिंग, सरप्राइज टेस्ट, कंप्यूटर लर्निंग, पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन, ग्रंथ सूची, जीवनी , तथ्य खोज, पुस्तक समीक्षा, साहित्य, भाषण और घटनाओ कि समीक्षा आदि।

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सीसीई और पारंपरिक अंकन प्रणाली के बीच क्या अंतर है?

सीसीई एक सतत मूल्यांकन प्रणाली है जो छात्रों की प्रगति का आकलन करती है और उन्हें निरंतर प्रतिक्रिया प्रदान करती है, दूसरी ओर पारंपरिक अंकन प्रणाली एक अंतिम मूल्यांकन प्रणाली है जो छात्रों के समग्र ज्ञान और उपलब्धियों को मापती है। मूल्यांकन करता है.

उनके बीच मुख्य अंतर संक्षेप में नीचे दिए गए हैं:

सीसीई मूल्यांकन प्रणालीपारंपरिक मूल्यांकन प्रणाली
सीसीई निरंतर और नियमित मूल्यांकन को बढ़ावा देता है।जबकि पारंपरिक अंकन प्रणाली अंतिम मूल्यांकन पर आधारित है।
सीसीई में छात्रों की प्रगति को लगातार मापा जाता है और उन्हें लगातार फीडबैक दिया जाता है।जबकि पारंपरिक अंकन प्रणाली में छात्रों का सालाना एक बार मूल्यांकन किया जाता है।
सीसीई में छात्रों के विभिन्न क्षेत्रों में कौशल, और ज्ञान का मूल्यांकन किया जाता है।जबकि पारंपरिक अंकन प्रणाली में छात्रों के अंक संग्रहित किए जाते हैं।

FAQs


Q). सीसीई प्रणाली क्या हैं?

A). यह वह प्रणाली है जो सीबीएसई के पुराने पैटर्न के बजाए एक नए पैटर्न को फलौ करता है। जहा पुराने पैटर्न मे छात्रों का सालाना एक बार मूल्यांकन किया जाता था बही सीसीई का नया पैटर्न साल भर मे कई अलग अलग पकार के परीक्षाओ का आयोजित करता है।

Q). सीसीई का क्या अर्थ है?

A). सीसीई या सतत और व्यापक मूल्यांकन स्कूल से संबंधित सभी गतिविधियों में बच्चे के विकास का मूल्यांकन करने की एक प्रक्रिया है। इसे 2009 में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत भारत के केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और राज्य सरकारों द्वारा लागु किया गया था।

Q). सीसीई के कौशल क्या हैं?

A). विज्ञान से लेकर, कला, गणित, भाषा का ज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, और शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों की उपलब्धियों के साथ-साथ मूल्यों, दृष्टिकोण, रुचियों और आदतों जैसी कई और विशेषताए इसमे शामिल है।

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